गरीब परिवारों के लिए सहारा बने सलीम कुरैशी, जरूरतमंदों को पहुंचाई राहत सामग्री
2022 के सड़क हादसे में घायल कुशनु चाम्पिया का कराया इलाज, वर्षों से दवा, राशन और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर निभा रहे मानवता का फर्ज

पश्चिमी सिंहभूम जिले के नूईया गांव निवासी कुशनु चंपिया की जिंदगी वर्ष 2022 में हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। दुर्घटना में उनके पैर और कमर की हड्डियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं,प्रारंभिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें घर भेज दिया और आगे के इलाज के लिए दोबारा बुलाया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे अस्पताल नहीं पहुंच सके।परिवार की माली हालत बेहद खराब होने के कारण कुशनु चंपिया करीब एक वर्ष तक बिस्तर पर एक ही करवट पर पड़े रहे। उनके लिए स्वयं उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया था। परिवार में एक छोटा बेटा और वृद्ध मां होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती बन गया था।
इलाज, दवाइयों और भोजन तक की व्यवस्था करना परिवार के लिए संभव नहीं रह गया था।वर्ष 2023 में इस मामले की जानकारी कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी सलीम कुरैशी को मिली। इसके बाद उन्होंने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए कुशनु चंपिया को बेहतर इलाज की जिम्मेदारी अपने स्तर पर उठाई। उन्होंने अपनी गाड़ी से उन्हें रांची भेजकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज की व्यवस्था कराई। लगातार इलाज और दवाइयों के कारण कुशनु चंपिया की स्वास्थ्य स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा और उनमें सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद जगी।
सलीम कुरैशी ने केवल इलाज तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी। वर्ष 2023 से अब तक वे समय-समय पर कुशनु चंपिया के परिवार वालों के लिए दवाइया राशन, कपड़ों और अन्य आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था करते आ रहे हैं। परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहयोग देकर उन्होंने संकट की घड़ी में एक मजबूत सहारा बनने का प्रयास किया है।
करीब 1 साल पहले सलीम कुरैशी ने नूईया गांव के एक परिवार के बच्चों के राशन पानी के व्यवस्था अपने ऊपर ली थी उसे भी राशन पहुंचा दिया गया है सलीम कुरैशी ने कहा कि समाज के कमजोर और असहाय लोगों की सहायता करना हर सक्षम व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है।उनका प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति इलाज, भोजन या अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान न रहे।स्थानीय ग्रामीणों ने सलीम कुरैशी की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि वे गुआसाई, ठाकुर और नूईया जैसे आदिवासी बहुल गांवों में जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहते हैं। चाहे गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था करनी हो, गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाना हो या अन्य सामाजिक सहयोग देना हो, वे लगातार लोगों के बीच सक्रिय रहते हैं। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि समाज के अन्य लोग भी इसी तरह आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करेंगे, ताकि मानवता और सामाजिक सहयोग की यह भावना और मजबूत हो सके।




