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पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश, कार्यपालक अभियंता कार्यालय पहुंच सौंपा ज्ञापन

मरम्मत नहीं होने पर 48 घंटे की चेतावनी, ताला बंदी और उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में पेयजल समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार, 5 मई 2026 को हाट गम्हरिया, जगन्नाथपुर और नोवामुंडी प्रखंड के दर्जनों ग्रामीण चाईबासा स्थित कार्यपालक अभियंता कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्रों में कई चापाकल और जल मीनार लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन विभाग द्वारा उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इससे क्षेत्र के लोगों को भीषण गर्मी में पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में भी इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया था और विभाग को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

ग्रामीण प्रतिनिधि तिरिया ने बताया कि पेयजल समस्या को लेकर 48 घंटे का भूख हड़ताल और विभाग के समक्ष हांडी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था, इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि पेयजल विभाग “हाथी दांत” साबित हो रहा है, जिसका आम जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डीएमएफटी फंड से जुड़े अधिकारी, ठेकेदार और कुछ जनप्रतिनिधि लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि आम लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। उन्होंने विभागीय कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर कार्य नहीं हो सकता, तो कार्यालय बंद कर देना चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर खराब चापाकल और जल मीनार की मरम्मत नहीं कराई गई, तो वे पेयजल विभाग कार्यालय में ताला जड़कर उग्र आंदोलन करेंगे।

इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ज्ञापन की प्रतिलिपि उपायुक्त एवं उप विकास आयुक्त, चाईबासा को भी भेजी गई है।

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