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गुवासाई सरना स्थल में पौधों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग की बैठक

जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प, पौधों की सामूहिक निगरानी करेंगे ग्रामीण

नदी तट पौधरोपण कार्यक्रम के तहत गुवासाई सरना स्थल एवं देशाउली में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर ग्रामीणों एवं वन विभाग के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरना स्थल की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता के साथ पौधों के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा पर चर्चा की गई। दिउरी सुशील पुरती ने कहा कि सरना स्थल केवल पूजा-पाठ का स्थान नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था, परंपरा और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पौधरोपण से आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिलेगा तथा सरना स्थल की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली बढ़ेगी। बैठक में ग्रामीणों को पौधों की सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

ग्रामीणों ने महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और बच्चों के साथ मिलकर पौधरोपण क्षेत्र की निगरानी करने पर सहमति जताई। पशुओं से पौधों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पालतू पशुओं को क्षेत्र में प्रवेश नहीं देने तथा पौधों के चारों ओर बनाए गए घेरान की निगरानी करने का निर्णय लिया गया। घेरान क्षतिग्रस्त होने पर सामूहिक रूप से उसकी मरम्मत भी की जाएगी। ग्रामीणों ने सरना स्थल में मौजूद पेड़-पौधों, पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं की सुरक्षा का संकल्प लिया। वन विभाग, गुवा रेंज के प्रधान वनरक्षी छोटेलाल मिश्रा ने ग्रामीणों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से आगे भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए मिलकर कार्य किया जाएगा। उन्होंने सरना स्थल के संरक्षण एवं विकास के नए प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही। बैठक में जगमोहन पुरती, सुरेश चाम्पिया, सुशील पुरती, राज पुरती, मंगल पुरती, सुमित्रा पुरती, चंद्रमोहन पुरती, टीनू पुरती, विकास पुरती, विनय पुरती और लखन पुरती सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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